छायी हुई खामोशी है
मन में एक उदासी है
कट रही है शाम युंही
साथ आज मायुसी भी है
दूर तक फैली तनहाई
फिजा भी कुछ सहमीसी है
ये किसने दी दस्तक ? या सिर्फ वहम हमारा?
कोई पास आनेकी आहटसी है .
इंतजार सुनी रांहो पर
मंझिले अब अंजानसी है
गुजर गये कितने कारवां यही से
पर एक तसवीर यांदो में धुंधलीसी है.
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