कुछ सवाल उठ रहे है जहन में ........
के उनकी राह में नजरे बिछाये सादिया हुई
ना कभी हम मिले उनसे ना वो हमसे,
फिर क्यों बेवजह गलीयो में हमारी बदनामिया हुयी?
केह ना पाए किस तरहसे काटी तनहा राते हमने,
चुपकीया उनके लिये गलताफैमिया हुई।
बेराह भटकते रहे हजार रांहो पर हम,
मंझीले छुट गयी हमसे, तो वो हमारी बेवफाईयां हुई।
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