कंहा वफ़ा का सिला देते है लोग
अब तो मोहब्बत की सजा देते
है लोग
पहले सजाते है दिलो मैं चाहतों
का ख्वाब
फिर एतबार को आग लगाते है लोग.
मत ढूंढो जख्म के निशान जिस्म
पे मेरे
हर चोट दिलपे देकर निकल जाते है लोग
जिंदगीमे कुछ मजबूरियाँ, कुछ
उल्झने बेशक होगी
पर चाहत बुलंद हो तो , अपनों से दूर नहीं जा पाते है लोग.