इंतजार सुनी रांहो पर


छायी हुई खामोशी है
मन में एक उदासी है 
कट रही है शाम युंही 
साथ आज मायुसी भी है

दूर तक फैली तनहाई 
फिजा भी कुछ सहमीसी है 
ये किसने दी दस्तक ? या सिर्फ वहम हमारा
कोई पास आनेकी आहटसी है .

इंतजार सुनी रांहो पर 
मंझिले   अब  अंजानसी है
गुजर गये कितने कारवां यही से 
पर  एक तसवीर यांदो में धुंधलीसी है. 
माना के तेरी जिंदगी में अब हम शामिल नहीं,

मिल जायेंगी तुम्हे रोज राहे नयी.

पर एक बार तो कहते  झुठा ही सही,

के हर वक्त हमारी याद आती रही.
रातकी मदहोशी सुना रहे थे हम

कुछ ख्वाबों मैं अब भी जी रहे थे हम ..........

पर अपनीही धुन मैं चले जा रहे है वोह

क्यों सुन ना सके क्या केह रहे थे हम.


शाम की देहलीज़ पर बैठे रहे रातभर

तो हाल ए दिल आंखोसे कहा लब्जोमें कहा कुछभी नहीं

रातभर बिछाये मोती जिसपर वह कागज़ जब भेजा

.....तो लिखा उस पर कुछभी नहीं
तुम्हारी एक निगाह की बात है

पर हमारी जिंदगी का सवाल है

..........रख इतनी मेहर नज़र हमपर

वर्ना ए-जिंदगी, हमारे जिन्दा होने का सबूत क्या है!!!!!
इस कदर निगाहोंसे से देखते है वो

चाहत की प्यास जगाते है वो

दिलकी काशिश इधर भी है उधर भी

जानकर भी अनजानसे मुस्कुराते है वो